
हत्थां दा लिख्या लक्ख मिटाए कोई, हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा..... लक्ख करें जतन तू जट्टा, किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा...Read more.
Posted on 27 November 2009 | 11:14 pm
खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ.. कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां…. - गौरव संगतानी...Read more.
Posted on 26 November 2009 | 10:15 pm
कच्ची मिट्टी है, दिल भी इंसा भी देखने ही में सख्त लगता है आंसू पोंछे तो आंसुओं के निशां खुश्क़ होने मे वक़्त लगता है...Read more.
Posted on 13 September 2009 | 11:27 am