निरुद्देश्य जीवन न रह जाए, ज़रा देखना सभी

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माना की झूठ उछलता मृगशावक सा तीव्र सच्चाई की डोर से इसे, बाँध लाना है मेरे यार । वतन के वास्ते न मिट

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