झूठे सपनों के पार

5

है सूरज निकल पूरब से जाता हर रोज़ पश्चिम की ओर पानी लिए नदियां हर पल हैं मिलती रहती सागर में बादल ब

Read this post on rajneesh-tiwari.blogspot.com


Rajneesh Tiwari

blogs from Raipur