दिल्ली है सांडों की, बलात्कारियों की!

4

नहीं हुजूर! दिल्ली दिल वालों की नहीं हो सकती! दिल्ली तो है अब सांडों की! कामुक जानवरों की!

Read this post on swaarth.wordpress.com


Swaarth

blogs from Dehradun