आंधियों तुमने दरख्तों को गिराया होगा!

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आज कैफ भोपाली साहब की लिखी एक गज़ल याद आ रही है। वैसे तो गज़ल के सभी शेर स्वतंत्र होते हैं...

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Shri Krishna Sharma

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