ग़ज़ल: चमकते चाँद को गरहन लगाना काम है उसका

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सरे महफ़िल कहेगा दाल रोटी के भी लाले हैं/ मगर चपचाप मुर्गे को उड़ाना काम है उसका

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Bharat Tiwari

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