प्रेम के ढाई आखर

7

अब तो प्रेम के नाम पर सिर्फ़ स्वार्थ है। सब कुछ स्वार्थवश और समय की सुविधा के अनुसार होता है। आज कल

Read this post on ranjanabhatia.blogspot.com


ranju

blogs from delhi