
Gaurav Sangtani
blogs from Rishikesh


जितना जाना जिंदगी को, बस इतना ही जाना है जाना...... कुछ भी नहीं है जानने को, बस वो पाया जिसने जो माना.... सारे पोथे, सारी बातें, मन को बहलाने का खेला.... जिसका मन बहले है जिस से, वो समझे उसने वो जाना...... बातों से ही तो बनी है दुनिया, बातें तेरी मेरी और सबकी....... बातों ... ... Continue reading →...
Posted on 9 April 2012 | 10:26 pm
Read postक्यूँ मसरूफ रहें हर वक्त, चंद लम्हें फुर्सत के भी बिताएं जाएँ | क्यूँ हर रिश्ते का नाम हो, एक मोहब्बत बेनाम भी निभाई जाये || तेरा नाम न आ जाये जुबान पे, ये कहानी दिल में ही छुपाई जाये | खुली आँखों से देखें हैं ख्वाब तेरे, एक रात जग के भी बितायी जाये ... ... Continue reading →...
Posted on 24 March 2010 | 1:00 am
Read postसोचा नहीं कभी हमने, क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है | क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं, आँखें क्यूँ हैरान हैं || सोचा नहीं कभी हमने, क्या रिश्ता ये अनजाना सा | क्या डोर बांधें है हमको, क्यूँ लगता सब अफसाना सा || सोचा नहीं कभी हमने, क्या होगा जब तुम जाओगे | खुद को ही खो ... ... Continue reading →...
Posted on 23 February 2010 | 9:26 pm
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