


रुसवा हो गए वो जमाने मे ऐसे । कि पलके झुकी तो फ़िर उठा ना सके ॥ दूर जाकर मुझसे, इम्तिहान ले रहे थे वो । चाहकर भी मुझे फ़िर पा ना सके ॥ कहते थे वो कि उन्हे दर्द नही होता । पर अश्को को अपने छुपा ना सके ॥ हम बने पत्थर उनकी जुदाई से । फ़िर कभी वो हमे रुला ना सके ॥ दिल जब टूटा, तो टुकडे हुए कुछ ऐसे । चाह...
Posted on 5 January 2014 | 9:27 pm
Read postहाथों मे हाथ डालकर जब चले थें हम, सारे जमाने की नजरों से ढले थे हम । सही थी जलालत-औ-रुसवाई सारे जहां की , फ़िर भी इरादे से अपने ना हिले थे हम । जुदा करने की हमें लाख कोशिशों के बाद भी, शहर की पुरानी गलियों मे फ़िर मिले थे हम । सारे खंजर हो गए थे खून के प्यासे , बचकर काफ़िरों से किसी तरह निकले थे हम । ब...
Posted on 5 January 2014 | 9:22 pm
Read postतुझे देखे बिना आराम नही अरमानों को । हमने शाम-ओ-शहर तेरी ही चाहत की है ॥ और तो कुछ भी नही मांगा हमने रब से । बस तुझे पाने की ही इबादत की है ॥ तू नही मिली तो क्या हुआ ए जान-ए-तमन्ना, हमने तो तेरी तस्वीर से भी मौहब्बत की है । रुसवा हो गया अमित, जुदाई से तेरी । आखिर ये तुमने कैसी कयामत की है ॥...
Posted on 5 January 2014 | 9:17 pm
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