
pawan nishant
blogs from mathura


कौन कहता है कि मुझे हैरां देखोमेरा खोया खोया सा चेहरा देखोजाओ सो जाओ रात का वक्त हैनींदों में क्यूं खुद को परेशा देखोसुबह सुन लेना अभी कह न सकासूखी आखों में पानी ठहरा देखोमेरी आदत में है यूं रूठते रहनाछोटी बातों में खुद बिछड़ा देखो।।...
Posted on 14 February 2012 | 11:56 pm
Read postकौन कहता है कि मुझे हैरां देखोमेरा खोया खोया सा चेहरा देखोजाओ सो जाओ रात का वक्त हैनींदों में क्यूं खुद को परेशा देखोसुबह सुन लेना अभी कह न सकासूखी आखों में पानी ठहरा देखोमेरी आदत में है यूं रूठते रहनाछोटी बातों में खुद बिछड़ा देखो।।...
Posted on 14 February 2012 | 11:56 pm
Read postजिस तरह के होउसी तरह से देना चाहता हूं मैं तुम्हें नए साल की शुभकामनाजितने तरीके से समझ सकते हो तुमउतने तरीके से भी।।मैं तुम्हारे इरादों में शामिल हूंऔर घटनाओं में भी, जिस तरह शामिल हो गया नए साल का यह पहला दिन तुम जो चाहो मांग लो मुझसे और न चाहो मुझे तो कोई बात नहींऔर न मांगों तो भी कोई बात नहींडूब...
Posted on 31 December 2011 | 10:00 pm
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