


जायज एडजस्टमेंट रिश्तों को मजबूत बनाता है, खुद को बदलना रिश्तों को कब्र तक ले जाता है... एडजस्टमेंट का मतलब हमारी सोच समझ आदतें सब वही हैं, बस हमने अपनी नापसंद वाली चीजें भी सामने वाले के लिए मैनेज कर ली हैं... जबकि खुद को बदलने का मतलब अब वो चीजें हमें नापसंद नहीं रहीं... इस तरह के बदलाव कभी स्थायी...
Posted on 11 January 2017 | 2:12 pm
Read post● दो बूँद का सागर ● (01-01-2015) बेबसी अब हद से गुजरने लगी है शब्द अब तुम तक पहुँच न पाते हैं, आँखें बेशक काबिल हैं समझाने में, उफ़ पर्दा आँखों पर चढ़ाये बैठी हो, दो बूँद लिखते में अच्छी लगती है, क्या करूँ मोटू मगर. अब आँखों में दरिया उमड़ आता है... jogi (jc) ● Jogendra Singh - जोगेन्द्र सिंह...
Posted on 1 January 2015 | 10:02 pm
Read post● टूटा नान (कटाक्ष कहानी) ● ● काफी देर से टकटकी बाँधे काँच की उस दीवार के पार भीतर शोकेस में रखी छोटी-2 प्लेट्स को वह घूरे जा रहा था... बीच-2 में साँप सा लहराता और भीतर को चला जाता... बदले में पीछे होठों पर छोड़ जाता कुछ सघन तो कुछ छितरे लार-रस के अवशेष... जाने कितनी देर से वो उस शोकेस में रखी प्लेट्...
Posted on 30 December 2014 | 7:51 pm
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