
Vinayak Dubey
blogs from Bhopal


मुन्ना अब स्कूल नहीं जायेगा, चिंकी अब १२ की हो गयी है अब उसका ब्याह कर देंगे, गाँव की ज़मीन बेचकर अब शहर में दुकान खरीदना है. ये सारे अहम् फैसले यहीं लिए गए. इन्ही "पाखाना सभाओं" में. आप ब्रह्म मुहूर्त में किसी गाँव की तरफ या झुग्गीओं की तरफ निकल जाइये और आपको मल त्याग करते हुए कई ऐसे समूह मिल जायें...
Posted on 26 February 2011 | 3:24 pm
Read postकुछ खुशियाँ कुछ उम्मीदें कुछ ख्वाब दूंगा. जिंदगी को अपनी मैं एक नया रुआब दूंगा. न तुम मुझे पहचान पाओगे न मैं खुद, अब मैं खुद को ऐसा नकाब दूंगा. सियासतदार से जो मैंने माँगा सुकून, वो बोला मैं बस ज़हर दूंगा तेजाब दूंगा. न पूछो कोई सवाल जानता हूँ सारे, जब होगा जवाब तो मैं जवाब दूंगा. मांग लिया है दुनिया...
Posted on 24 February 2011 | 11:18 pm
Read post"चचा बहुत फुर्सत में हूँ, क्या करूँ?" चचा के ऑफिस में घुसते ही मैंने पूछा. "अरे आओ छोटे! हमेशा की तरह फिर फुर्सत में हो?" चचा हँसते हुए बोले. आदमी खुद फुर्सत में रहे, जिसे आजकल "फ्री" रहना कहते हैं तो बुरा नहीं लगता लेकिन कोई कहता है की "फ्री" हो क्या तो लगता है गाली दे दी. उस "फ्री" पर लगे कंडीशन ए...
Posted on 12 October 2010 | 6:50 pm
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