वन्य जीव संरक्षण में स्थानीय निवासियों को शामिल करना चाहिए। इससे उनमें वन्य जीव संरक्षण में निहित हित बन जाएंगे। इससे वे वन्य जीवों को नुकसान पहुंचानेवाली ताकतों से सहयोग नहीं करेंगे।
लेकिन मुझे नहीं लगता कि केवल स्थानीय लोग वन्य जीवों की रक्षा कर पाएंगे। उनके पास पर्याप्त साधन नहीं होंगे।
असल में देखा जाए, तो बाघ, हाथी, सिंह, भैंसा, गैंडा आदि वन्य जीव सारे राष्ट्र की और सारी मानव जाति की धरोहर हैं। उन्हें बचाने के काम में पूरे राष्ट्र को और पूरी मानव जाति को आगे आना होगा। अन्यथा कुछ न हो सकेगा।
इसीलिए पर्यावरण शिक्षण अत्यधिक महत्व की चीज है। वह लोगों को समझाता है कि वन्य जीव, प्रकृति, प्राकृति संसाधन आदि को बचाना सभी के फायदे की चीज है।
इस तरह शहरों में रह रहे लोग भी, जिनका जंगलों से सरोकार केवल वहां चंद दिनों की छुट्टियां बिताने तक ही सीमित होता है, वन्य जीवों के संरक्षण में योगदान कर सकते हैं।