निश्चय ही भारत एक निर्धन देश है। देश की निर्धनता-संपन्नता उसके लोगों की निर्धनता-संपन्नता से संबंधित होती है।
देखिए हमारे लोग कितने संपन्न हैं:-
भारत में जीवन की प्रत्याशा 65 वर्ष है, जबकि संपन्न देशों में यह 80 से अधिक है।
बाल मृत्यु दर भारत में 110 प्रति 1000 जन्म है, जबकि चीन, अमरीका, यूरोप आदि में यह 8-10 प्रति 1000 ही है।
प्रसव के समय माता की मृत्यु दर भारत में विदेशों से कहीं ज्यादा है।
साक्षरता स्तर भारत में मात्र 65 % है, जबकि संपन्न देशों में यह 100% होती है।
शहरीकरण की दर भारत में 30 % है, जबकि संपन्न देशों में यह 70 % से अधिक होती है।
कृषि पर निर्भर लोगों का प्रतिशत 70% है, जबकि संपन्न देशों में यह 5-6% ही होती है।
भारत में पैदा हुए 70% बच्चों का वजन जन्म के समय सामान्य से कम होता है।
भारत की 60% महिलाओं में खून की कमी है।
भारत के 60% व्यक्तियों में टीबी का रोगाणु सुषुप्तावस्था में रहता है।
ओलिंपिक्स में भारत को 1-2 स्वर्ण पदक ही मिलते हैं, जबकि अमरीका, चीन आदि को 50-60।
भ्रष्टाचार आदि के मामले में भारत बहुत आगे बढ़ा हुआ है। अभी 200 देशों का क्रम भ्रष्टाचार पैमाने पर निर्धारित किया गया था। भारत स्थान उसमें 137 था।
स्वास्थ्य के कुछ प्राचलों में भारत की स्थिति सब सहारा अफ्रीका से भी गई गुजरी है - इनमें शामिल है महिलाओं का स्वास्थ्य, बच्चों का स्वास्थ्य, कुपोषण, आदि।
भारत निश्चय ही एक बहुत गरीब देश है, भले ही उसमें दो चार अंबानी, टाटा, बिड़ला रहते हों।