
Neelima Sharma
blogs from Dehradun


अब तुम कही भी नही हो कही भी नही ना मेरी यादो में न मेरी बातो में अब मैं मसरूफ रहती हूँ दाल के कंकड़ चुन'ने में शर्ट के दाग धोने में क्यारी में टमाटर बोने में एक पल भी मेरा कभी खाली नही होता जो तुझे याद करूँ या तुझे महसूस करू मैंने छोड़ दिए नावेल पढने मैंने छोड़ दिए है किस्से गढ़ने अब मुझे याद रहता हैं ब...
Posted on 18 July 2017 | 10:12 pm
Read postअक्षर गुम गये हैं और ख़तम हो गयी स्याही और मन में बहते भाव के स्त्रोत्र सूख गये हैं तुम जानते थे ना मैं जिस दिन ना लिखू अधूरी सी रहती हूँ न कोई सिंगार अच्छा लगता हैं न कोई भी मनुहार तुम मुझे एक वक़्त का खाना मत देना मुझे दे देना कुछ वक़्त बस जो सिर्फ मेरा हो जी लूँ उसमें दिल से दिल को अक्षर मेरी धड़कन ह...
Posted on 18 July 2017 | 9:56 pm
Read postसमीक्षा चुन्नियों में लिपटा दर्द हरकीरत हीर हरकीरत हीर नाम लेते ही एक मासूम शांत सा चेहरा आँखों के सामने आ जाता हैं । हिन्द युग्म से प्रकाशित "खामोश चीख़े" जब मैंने पढ़ा था तो उनकी नज़्मो की प्रशंसिका बन गयी थी । असम निवासी हरकीरत हीर जी का परिचय किन्ही शब्दो का मोहताज़ नही हैं । अयन प्रकाशन से उनकी पुस...
Posted on 25 February 2017 | 10:11 pm
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