
Rupal M Chordiya
blogs from Nashik

मेरे साधर्मी भाई-बहनों को जय जिनेंद्र! भगवान ने कर्म निर्जरा के अनेक मार्ग बताएं हैं। दान, शील, तप, भाव इन चारों में तप यह एक उत्तम मार्ग हैं। तपस्या से हम पुराने कर्मों की निर्जरा कर सकते हैं। जैन धर्म में नवकारसी से लेकर मासखमण, वर्षी तप की तपस्या हम अपने शक्ति के अनुसार कर सकते हैं। तो चलिए, अपने...
Posted on 15 March 2019 | 4:40 am
Read postमेरे साधर्मी भाई-बहनों को जय जिनेंद्र ! जैन धर्म में संयम को बहुत ही महत्व है। वास्तव में मणुष्य भव की सफलता संयम में ही है। संयम लेकर ही हम मोक्ष के अव्याबाध सुख को प्राप्त कर सकते हैं। बहुत ही कम ऐसे विरले होते हैं, जो दीक्षा लेकर अपना जीवन ऊंचा उठाते हैं। तो चलिए, ऐसे दीक्षार्थी भाई-बहनों का सत्क...
Posted on 15 March 2019 | 4:28 am
Read postहमारा भारत देश जिसे सोने की चिड़िया कहा जाता है। जिसकी खूबसूरती हर किसी को लुभाती है। जहां की हर एक बात निराली है। तो चलिए ,हमारे देश की खूबसूरती बयां करने के लिए आज मैं आप सभी के साथ मेरा आदर्श गांव पर हिंदी निबंध / भाषण शेयर कर रही हूं ... मेरा आदर्श गांव निबंध / भाषण Speech / Essay on My Ideal Vi...
Posted on 3 March 2019 | 7:14 am
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