


दीवार के उस कोने तक नहीं पहुंचती है रोशनी या तो अंधेरा रहता है वहां या परछाईयों के अंधेरे-उजाले उसी एक ठंडी-अंधेरी दुनिया में पड़ी है एक टीन की डिबिया। कुछ पुराने कागज हैं जिसमें टूटे-अनटूटे कुछ कंचे कलाई-घड़ी का ... Continue reading →...
Posted on 8 March 2015 | 2:57 am
Read postठंड से ठिठुरते उस एक बूढ़े ने मौसम को कोसा कुछ गंभीर-गंदी गालियां बक दीं मन-ही-मन पता न चल पाने वाली एक घटना में एक छोटा प्यारा बच्चा अहक-अहक, सुबक-सुबक सांसे टांग कर रोया पेराम्बूलेटर में लेटे लेटे जब उसकी ... Continue reading →...
Posted on 8 March 2015 | 2:56 am
Read postवह आदमी कूदा तो था छत से मगर उड़ गया अवसाद की शक्ति उसे ऊपर खींच ले जाती है हवाओं में झूलता है उसका जिस्म लटकते हैं जिसपर बादलों के फाहे अब आसमान में चिड़िया गाती है धरती पर छत ... Continue reading →...
Posted on 8 March 2015 | 2:54 am
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