


एक रात .. आसमान के कोनों में ऊँघती रहती है.. एक नदी .. गिर कर भी समंदर में.. रास्ते बूझती रहती है.. गूँजती रहती है.. पतझड़ के पन्नों पर माज़ी का अलाव.. कुछ बारिशें टहनियों पर टूँगती रहती हैं.. आँगन की चमेली अपनी सुगंध में.. स्वपन झरोखे गूँधती रहती है .. रेत की हथेलियों में लहरों के पलछिन.. सीपियों श...
Posted on 9 November 2017 | 9:29 am
Read postमैं फटा हुआ टायर हूँ.. ऊपर से फूला हुआ.. अंदर से कायर हूँ..मैं फटा हुआ टायर हूँ.. काले को काला लिख कर .. कहता ख़ुद को शायर हूँ..मैं फटा हुआ टायर हूँ.. तेल में तैरते भटूरे की तरह.. फूँडने में मैं भी माहिर हूँ.. मैं फटा हुआ टायर हूँ.. गीता पर रख कर हाथ .. सच कहता हूँ मैं लायर हूँ.. मैं फटा हुआ टायर हू...
Posted on 7 May 2017 | 10:28 pm
Read postमेरे जलते शब्दों के ढेर में .. कुछ यादों के गीले काग़ज़ भी हैं.. और उनसे उफनते बादल भी .. जो बदन पर चिपक गए हैं.. बर्फ़ पर जिस्म सेंकते पुरानी बातों के गुच्छे .. जिन्हें आवाज़ ने कभी चाँद पर भेज दिया था .. पिघल करनदियों में बहने को .. मैं मृगतरिश्ना में भटक कर ज़मीन में धँस गयी हूँ.. और यहाँ सैंकड़ो...
Posted on 8 January 2017 | 1:18 pm
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