Poetry

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Noopur Shandilya
9 hours ago

दायित्व

अपने अपने आले में,  दीपक बन के  जलते रहें । इतना भी बहुत है,  अंधकार में  उजाला लाने के लिए । 

Noopur Shandilya
8 hours ago

कही कविता

बचपन से ही कविता को     संकट के कठिन समय में  संजीवनी बूटी बनते देखा।  सुख के चंचल चपल दिनों में  अहाते में चौकड़ी भरते देखा।  घर ...

Saurabh Chawla
17 hours ago

That day, I killed myself!

life poems, poetry, poems, poems about life

Dimple
21 hours ago

PETA

PETA has become a Joke on account of his hypocrisy. It shows fake concern for animals suffering from Noise Pollution but has its lips sealed on their merciless

TheBlueEyedSon
22 hours ago

साँवले होठों वाली: एक सिगरेट से ज़्यादा कुछ थी ही नहीं

आदत बन आई तो, कहते हो पीना ठीक नहीं | जल जल कर जीना, ऐसे जीना ठीक नहीं

Supriyaa Srivastava
20 hours ago

आखिर क्या चलता है मन के मन में

क्या है ये मन,  कभी चंचल, कभी गंभीर तो कभी सोच के सागर में डुबकियां लगता है ये मन कभी खुद से बिगड़ जाता है तो कभी खुद को ही मना लेता...

Abhi Surendran
23 hours ago

A sonnet to Australia

A sonnet to Australia, as part of an ongoing project to write a sonnet for every country that I visit.

Pradita
1 day ago

Reading Love

  Copyright ©2017 Pradita Kapahi. All rights reserved. Original Image: Pinterest

Rohit Nag
1 day ago

लम्हे !!

मीलो की दूरी थी, मुलाकातें भी अधूरी थी | तेरे होने का एहसास था, तेरा हर लम्हा मेरे पास था || दूरी तो कम हो गयी, कुछ एक मुलाकातें भी हों गयी | न जाने क्यों सबकुछ खो गया, तूने  पराया किया ही, अब…

Sumathi G
2 days ago

A Shepherd On The Hills

A Piercing gaze, A quizzical look Curious about the purpose An unwilling half broken smile On a memories creased face,   A faded topi colour lost in the sun, Tell tales of the time on the mountains…

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