


शामें बुझी सी नहीं मौसम बेरंग नहीं दिन ये बंजर नहीं सब कुछ सही है , सब कुछ वहीँ है फिर क्यूँ लग रहा है सब कुछ बिका हुआ सा है जैसे हम किसी और के जश्न में सजे हुये खड़े हैं !!
Posted on 16 July 2015 | 9:41 am
Read postमेरी 14 वर्षीय बेटी सुगंधा आज मुझसे इस बात पे नाराज़ होके चली गई कि उसके लेखक पिता के एक विवादस्पद इंटरव्यू में महिला - लेखकों के प्रति उनकी असंवेदनशील टिप्पड़ी पर टीवी छिड़े विवाद को देख मैंने उसके पिता के विरुद्ध कुछ नहीं कहा और जब सुगंधा गुस्से में अपने पिता के खिलाफ बरस रही थी उसकी बातों में अपनी स...
Posted on 16 November 2014 | 9:13 pm
Read postकल मेरा बचपन एक बार फिरसे मिला मुझसे बढ़ी उम्र ने समझदारी सौगात में दी लेकिन मासूमियत मुझसे वापस ले ली... चेहरे पे खूबसूरती ने जगह ली , पर भोलापन कहीं खो गया ... बचपन की शरारतों को मेरी नासमझी के नाम पर माफ़ी मिली... बचपन में जो बहुत ख़ास था , कल वो बड़ा साधाराड सा लगा... मेरा बचपन कल बस कुछ क़दमों की दू...
Posted on 16 September 2014 | 9:25 am
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