
vipul
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यात्रा... स्वयं की - १ (2 votes)
Posted 7 years ago under Social > Other Social Causes

Posted 7 years ago under Social > Other Social Causes
उजड़ती ज़िन्दगी, बिखरती तमन्नाएं।समेटू कहां।ये प्रश्न ही है जिसका बोझ उतारने को, भटकता हूं यहां वहां।वो स्थल है कहां जहां मै विश्राम करूकर्महीन होकर भी कर्महीन ना कहलाऊं,ऐसा जीवन हैं कहा।अभी तो युवान हूं,तब भी कदम डगमगा जाते,सहारा लेने जाऊ कहां।सोचता हूं,हवाओ में बहता जाऊ,बिन पंख उड़ जाऊ,दूर गगन से...
Posted on 12 May 2021 | 7:47 pm
Read postयदि कोई तुझ से कुछ न कहे,तुझे भाग्यहीन समझकर सब तुझसेमुंह फेर ले और सब तुझसे डरे,तो भी तू अपने हृदय सेअपना मुंह खोलकरअपनी बात कहता चल।अगर तुझसे सब विमुख हो जाए,यदि गहन पथ प्रस्थान के समयकोई तेरी ओर फिर कर भी ना देखे,तब पथ के कांटों को अपने लहू लुहान पैरो सेदलता हुआ अकेला चल। यदि प्रकाश न हो,झंझावात...
Posted on 19 December 2018 | 1:45 am
Read postदुखी है मन, जाने ना,घायल है अंजान के बाणों का,कराह रहा है अंधेरे में,रोशनी उसको कोई दिखाए ना।सिसक रहा सोच कर,कोई सुन ना ले आहट,पीड़ा ना बना दे पात्र उपहास का,क्या यही है कारण उसकी उदासीनता का।परन्तु साहसी है वह घायल,जो देता है स्वयं, मन को दिलासा,और ईश्वर से कहता है,तेरी इस नियति को भी स्वीकारा हैं।...
Posted on 19 December 2018 | 1:44 am
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