हिज्र ए तन्हाई में उठते धुँए की दास्तान होती है , दबी दबी सी चिंगारियों में शोलों सी ज़बान होती है ।

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हिज्र ए तन्हाई में उठते धुँए की दास्तान होती है , दबी दबी सी चिंगारियों में शोलों सी ज़बान होती है

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