
anamika
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mere gao me aanaa (6 votes)
Posted 16 years ago under Social > Environment
sudhar jao (4 votes)
Posted 16 years ago under Social > Other Social Causes


Posted 16 years ago under Social > Environment
Posted 16 years ago under Social > Other Social Causes
तूने दिखाया था जहां ए हुस्न मगरमेरे जहाँ ए हक़ीक़त में हुस्न ये बिखर गयाचलना पड़ा मुझे इस कदर यहाँ वहाँगिनने वालों से पाँव का छाला न गिना गयाक़ाबिल था भरोसा था खूब खुद परजालिम दुनिया से मगर ये भी न देखा गयाउम्र कट रही मेरी पहर पहर जागकरउनींदा रहता हूँ ये चाँद से भी न रहा गयाउजाला ए क़मर औ' तारों की जगमगा...
Posted on 18 July 2023 | 8:36 pm
Read postहमने रखे हैं नक्शे पा आसमां के ज़मीं परअब ज़मीं को आसमां बनने में देर न लगेगीटांग आयी हूँ सारे ग़म दरो दीवार के खूंटी परअब वफ़ाओं के मुस्कुराने में देर न लगेगीवो आलम वो लम्हा जो गवाह थे फ़साने केउन लम्हो को बीतने में ज़रा भी देर न लगेगीवो पुराना रास्ता गुलों से जो लबालब थाहवाला ए खिज़ा में अब उसे देर न लगे...
Posted on 6 November 2022 | 10:07 am
Read postतुझे जनता हूँ मैं जितना शायद ही कोई जानेतुझे अंधेरे से डर लगता है तू माने या न मानेकोई चींटी भी न आ जाये तेरे पैरों के नीचेसहम जाती है ऐसे जैसे तू चली है सज़ा पानेमैंने देखा है तुझे डरते हुए अपने ख़्वाहिशों सेअपने ऊँचे ख़्वाबों से अपने ऊँचे हसरतों सेन डर इतना दुनिया से के तू मासूम है बहुतमैं रहुंगा तेर...
Posted on 6 August 2022 | 8:40 am
Read post* क्रमशः :- "जवाहरलाल को और बच्चों की तरह स्कूल नहीं भेजा गया, उनकी शिक्षा अंग्रेज महिलाओं द्वारा घर पर ही हुई। जब वह ग्यारह साल के हुए तो एफ. टी. ब्रुक्स नाम के एक अंग्रेज अध्यापक को उनकी शिक्षा के लिए नियुक्त किया गया। उस समय ये लोग 'आनंद भवन' में रहते थे, जो एक शहाना महल था और मोतीलाल नेहरू ने हा...
Posted on 24 April 2017 | 2:31 pm
Read post"मोतीलाल दिलेर तबियत के शाह-खर्च आदमी थे, फिर उन्हें अपने-आप पर यह भरोसा था कि जितना खर्च करेंगे उससे कहीं अधिक बात की बात में कमा लेंगे। नतीजा यह हुआ कि परिवार का जीवन देखते ही देखते पूर्ण रूप से विलायती सांचे में ढल गया। इसी वातावरण में जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को हुआ। जवाहरलाल मोतीला...
Posted on 23 April 2017 | 11:28 am
Read post*"मोतीलाल पहले कानपुर में और फिर इलाहाबाद में पढ़ते रहे। पढ़ने-लिखने के बजाय खेल - कूद में उनकी ज्यादा दिलचस्पी थी। काॅलेज में वह सरकश लड़कों के अगुआ समझे जाते थे। 'मेरी कहानी' में जवाहरलाल ने लिखा है :"उनका झुकाव पश्चिमी लिबास की तरफ हो गया था और सो भी उस वक्त जबकि हिंदुस्तान में कलकत्ता और बंबई जै...
Posted on 22 April 2017 | 10:22 am
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