अनिल would like you to review his/her blog.
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कृपया मेरे चिट्ठे की समीक्षा क

मेरा चिट्ठा पूरी तरह से भारत और भारतीयता को समर्पित है। हिंदी लेखन की तकनीक को परखने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह चिट्ठा अब मेरे विचारों की अभिव्यक्ति का साधन बन चुका है। वैसे तो मैं बहुत से विषयों पर लिखता हूँ, लेकिन भारतीय समाज और राजनीति को सुधारने के विषय मेरे प्रिय रहे हैं।

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अनिल जी आपका ब्लोग बहुत पसंद आया। सरल लेआउट, पढ़ने में सुगम टाइप साइस, और बेहतरीन कंटेंट। मैं आपके ब्लोग को 8 का अंक दूंगा, 10 के पैमाने पर।

हिंदी और देश की उन्नति के प्रति आपकी समर्पण भावना हर पृष्ट पर दिखाई देती है। इसके लिए आपको साधुवाद।

एक और बात मुझे बहुत पसंद आई, आपने जो कुछ भी लिखा है, वह समस्या-निवारण के उद्देश्य से लिखा है, अथवा किसी समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिए। इससे निश्चय ही आपका ब्लोग परिवर्तन लाने का एक शक्तिशाली एजेंट बन गया है।

मुझे आशा है कि आप ऐसे ही लिखते रहेंगे और महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डालते रहेंगे और समाधान सुझाते रहेंगे।

 

 

Adesh Sidhu
Adesh Sidhu
from Gurgaon
11 years ago

Amazing witreups dude! You capable to putting things across in simplest possible way. I liked your writing style.

If you can add few photographs in your posts it will make it more colorful.

Keep blogging.  

बालसुब्रह्मण्यम और आदेश जी, आप दोनों का धन्यवाद। भारत में मुझे सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मिली है, जिसका उपयोग मैं भारत के उत्थान के लिये ही करना चाहता हूँ। भारत की परेशानियां बताना आजकल एक आदत बन चुकी है, लेकिन सुझाव कोई नहीं बताना चाहता। इसीलिये मैं कोशिश करता हूँ कि हर परेशानी बताते समय कोई सुझाव भी बता जाऊं, जिससे सैकड़ों पाठकों में से कोई एक तो सुधार के लिये पहल करे। "जोत से जोत जगाते चलो" - यही तो शिक्षा सिखाती है, क्यों?

जब मैंने हिंदी में ब्लाग लिखना शुरू किया था, तब मुझे पता भी नहीं था कि मुझे यह चस्का इस कदर चढ़ जायेगा कि मैं चुटकुलों और कहानियों से ऊपर उठकर भी लिखना शुरू करूंगा। लेकिन आज मैं अपने हिंदी ब्लाग पर हर तरह के विषयों के बारे में लिख रहा हूँ। इसका एक पहलू मुझे पसंद नहीं, कि मेरा चिट्ठा सभी विषयों की खिचड़ी बना हुआ है। कभी-कभी सोचता हूँ कि हर विषय के लिये एक नया चिट्ठा शुरू करूं, लेकिन पहले ही बहुत सारे चिट्ठों में टाँग फँसाये बैठा हूँ। शायद इस समस्या का हल कभी मिलेगा मुझे, ऐसा सोचना है।

Adesh ji, I usually add a picture to each of my posts. But I haven't added any pictures to the last few posts because of being too busy. I'll pay more attention to it from now, thanks for the great suggestion.

I'm still new to indiblogger.in and trying to see what can I do here. So please forgive my mistakes if any. Thanks and have a wonderful day!

अनिल जी, खिचड़ी वाली बात मेरे ब्लोग जयहिंदी पर भी लागू होती है, जिससे आप परिचित हैं।

अब मैंने भी अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग ब्लोग की नीति अपना ली है, मेरे अन्य दो ब्लोग प्रिंटेफ-स्कैनेफ और केरल पुराण इसी तरह अस्तित्व में आए।

मैंने आपके जितने ब्लोगों में हाथ नहीं डाल रखा है, इसलिए मेरी स्थिति आपसे कुछ बेहतर है, पर मुझे लगता है कि यह कुछ दिनों की ही बात रहेगी, क्योंकि कुछ और ब्लोग शुरू करने के विचार मन में घुमड़ रहे हैं। पता नहीं यह चस्का जहां ले जाकर छोड़ेगा।

 

Nishant Mishra
Nishant Mishra
from New Delhi
11 years ago

प्रिय अनिल, मैं श्री बालसुब्रमन्यम जी द्वारा आपके ब्लौग की समीक्षा से शत-प्रतिशत सहमत हूँ. आपने बहुत ईमानदारी से विविध विषयों पर अपने विचार रखे हैं. चूंकि आप बाहर से भारत को देखते हैं इसलिए आपको बेहतर दिखता है.बस एक बात... आपके ब्लौग का एड्रेस बहुत अलग है, याद रखना मुश्किल है. क्या इसमें भी कुछ खास है. एक और बात, मैंने अपने ब्लौग पर आपके ब्लौग की लिंक लगा ली है, वहां पर सबसे अच्छे ब्लौगों की लिंक ही लगाता हूँ. अपना ध्यान रखिये.

अनिल जी, आपका चिट्ठा खोलते ही तिरंगा फ़ेविकॉन के रूप में सामने आता है । मन देश के प्रति शुभ भाव से भर जाता है । बालसुब्रमण्यम जी द्वारा आपके चिट्ठे के सम्बंध में कहे गये विचार सत्य हैं ।

अब मेरा नाम भी आपके अनुसरणकर्ताओं में शामिल हो गया है । और  हाँ, सच में अपने ब्लॉग पते का कूटार्थ अगर खोलें तो मेहरबानी होगी ।

आप सभी का मेरे ब्लाग के प्रशंसक बनने के लिये शुक्रिया। दरअसल मुझे हमेशा से यही लगता रहा है कि मैं सिर्फ एक "आम भारतीय" हूँ - मुझमें वही भारतीयता है जो हम सबकी साँसों में बसती है। यह एक "अपवाद" ही है कि जीवन की ठोकरों ने मुझे संयुक्त राज्य ला फेंका, नहीं तो मैं दिल्ली-नामक छोटे से "गाँव" में ही खुश था। जब हम सब एक ही सोच रखते हैं तो फिर देश में इतना अलगाव क्यों?

हिमांशु जी, मेरे ब्लाग पर तिरंगे का फेविकॉन लगाने के लिये मैंने क्या-क्या पापड़ बेले थे, ये मैं ही जानता हूँ। लेकिन मैंने जीवन में हार माननी नहीं सीखी, इसलिये जो चाहता था, वह कर ही गया। कहने को 16x16 pixel की छोटी सी आकृति है, लेकिन इसे आपने खूब पकड़ा। यह हम सबके देशप्रेम को दर्शाता है। "जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी"

मेरे ब्लाग के पते का कूटार्थ कल की पोस्ट में बताउंगा। यह उस छोटे से तिरंगे के फैविकॉन से भी रोचक होगा! Laughing

अंत में एक सवाल: मुझे लगता है कि मेरे ब्लाग का नाम कुछ अच्छा रखा जा सकता है, कई महीनों से वही शुरुअाती नाम "अनिल का हिंदी ब्लाग" लेकर घूम रहा हूँ। कोई सुझाव? धन्यवाद!